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अजिंठा गुफाये भारत का इतिहास

अजिंठा गुफाये
सम्राट अशोक के काल से बौद्ध स्तूप और लेने का निर्माण होने लगा बौद्ध भिक्षु द्वारा होने लगा जो बहुत बौद्ध परंपरा से आते थे सम्राट अशोक ने लगभग देशभर में 24000 शिलालेख और अनगिनत विहार बनाएं विहार भिक्षु का एक रहने का ठिकाना था वहां पर वह रहते ध्यान करते और शिक्षा पाते थे विहारों में अलग अलग सी मुद्राएं तब की जीवन का स्वभाव संस्कृति आदि सब चीजें मिलती है इन सब चीजों में से बुद्ध कालीन इतिहास दर्शाया जाता है उसी प्रकार की महाराष्ट्र में अजंता लेनी प्रसिद्ध है अजंटा लेनी का इतिहास बौद्ध संस्कृति से जुड़ा हुआ है लेकिन इसकी खोज 18 शताब्दी में हुई थी अजंता कहां पर वेरुल भी है दो ढाई हजार साल पहले जबकि भारत एक बौद्ध राष्ट्र था तभी इन सुंदर कलाकृतियों का निर्माण हुआ है लेकिन मुगल शासक के द्वारा बहुत सारी बौद्ध धर्मात और विहारों का हनन हुआ लेकिन जो कुछ भी आज बचे हैं उनकी धरोहर करना हमारा काम है

अजंता गुफा महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले से 106 किलोमीटर दूर अजंता गुफाएं है अजंता गुफाएं बौद्धकालीन वास्तु है जिसे इसा पूर्व व 200 से लेकर 600 तक तराशा गया अजंता में लगभग 30 गुफाएं हैं जिनमें बौद्ध धर्म की धार्मिक कलाकृतियां दिखाई गई है अजंता में कई बिहार हैं जिन्हें चैत्यगृह भी कहा जाता है जो 2 चरणों में है पहला हीनयान चरण और दूसरा महायान चरण अजंता गुफाएं की खोज अजंता की खोज 1819 में ब्रिटिश अधिकारी की शिकार करने खो जाने पर उन्हें हुई थी अजंता गुफाओं में दिखाए गए चित्र एक में भैंस का विषय है अजंता को यूनेस्को ने मान्यता दी है मान्यता दी है यहां पर देश-विदेश से सैलानी और विद्यार्थी अभ्यास करने हेतु और बौद्ध धर्म का जानकारी हासिल करने आते हैं यह प्राचीन गुफाएं भारत की प्राचीन धरोहर देश मानी है अजंता के पास में ही बिलोरा गुफाएं भी हैं बिलोरा एक चट्टान में बनाया हुआ शिल्प है पूरी चट्टान को ऊपर से लेकर नीचे तक बनाया गया है अजंता आने के लिए नजदीक का गांव औरंगाबाद है जो के वहां से 100 किलोमीटर दूर ह_

औरंगाबाद जाने के लिए रेलवे और हवाई सेवा का आप उपयोग कर सकते हैं वहां से लगभग 2 किलोमीटर दूर है अर्जेंट है वहां पर जाने के लिए आपको सरकारी बस प्राइवेट कार्य ट्रेवल्स कर सकते हैं अजिंठा में ज्यादातर स्टूडेंट्स बाहरी देशों के लोग भारतीय संस्कृति का और बुद्ध संस्कृति का अभ्यास करने आते हैं यहां पर आकर वह हमारे संस्कृति से प्रसन्न हो जाते हैं

अगर अगर आप बाहरी देशों से आते हैं तो आपको दिल्ली या मुंबई एयरपोर्ट नजदीक हो जाता है वहां से आपको हवाई यात्रा द्वारा आप इन दोनों स्टेशन पर उतर सकते हो और वहां से औरंगाबाद हवाई अड्डे पर उतर सकते हैं वहां से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर आपको अपना प्राइवेट व्हीकल या फिर लोकल व्हीकल से वहां पर जाना पड़ेगा आपको वहां पर होटल अच्छी तरह से मिल सकते हैं अगर आप भारत के अन्य राज्यों से यहां पर आ सकते आना चाहते हैं तो आप मुंबई या फिर औरंगाबाद एयरपोर्ट पर उतर कर या फिर हाय वैसे भी आप यहां पर आ सकते हैं बाय रोड यहां पर सरकार द्वारा एमटीडीसी और लग्जरी होटल्स का उपलब्ध है

Author

Amol Kambale is founder "India-mirror" he has an interested in job news blog and entertainment topics and whatsoever his passion dedication

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