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दुनिया का सर्वश्रेष्ठ विद्यालय नालंदा उसका इतिहास

हमारी दुनिया का सर्व श्रेष्ठ विद्यालय नालंदा था इस का निर्माण कुमार गुप्त ने किया था  नालंदा में ऐसी कई मुद्राएं भी मिलती है जिससे इस बात की पुष्टि होती है बिहार राज्य के नालंदा जिले में स्थित एक दुनिया का एक श्रेष्ठ विद्यालय नालंदा था बौद्ध धर्म के लिए एक विशेष स्थान है यहां पर महायान संप्रदाय के बौद्ध भिक्षु रहा करते थे जो के धर्म पर चर्चा किया करते थे इसी ध्यान केंद्र के कारण इस जगह का नाम नालंदा पड़ा क्योंकि नालंदा का मतलब कमल है ज्ञान और शिक्षा के प्रतीक है मौर्य साम्राज्य के द्वारा पांचवी शताब्दी में नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई बाद के शासकों ने भी इसका संरक्षण किया

यह विद्यालय दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों में से था वहां पर पढ़ने के लिए लोग तिब्बत इंडोनेशिया श्रीलंका चीन जापान कोरिया फायर्स तुर्की नेपाल में अनुमान अफगानिस्तान-पाकिस्तान यहां से विद्या शिक्षा ग्रहण करने आते थे यहां की शिक्षक विद्वान थे प्रसिद्ध गणितज्ञ आर्यभट्ट विश्वविद्यालय के खगोलशास्त्र थे विश्वविद्यालय में छात्रों की शिक्षा रहने की व्यवस्था भोजन एवं स्वर खर्च विश्वविद्यालय करता था जहां पर विश्वविद्यालय को 200 गांव दान दिए थे उनका उसे उस विश्वविद्यालय की आय होती थी और वैसे ही दुनिया भर से विश्वविद्यालय को जो बच्चे पढ़ने आते थे उनसे मदद होती थी 10,000 विद्यार्थी शिक्षा लेते थे जिन को शिक्षा देने के लिए 2000 शिक्षक थे 7 वीं सदी में किया विश्वविद्यालय अपने चरम पर था यहां पर बौद्ध धर्म के महायान के साथ साथ हीनयान वेद गणित चिकित्सा ज्योतिष की भी पढ़ाई होती थी यह विश्वविद्यालय स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना था

इस विश्वविद्यालय की दीवारें बहुत विशाल थी यह विश्वविद्यालय बौद्ध धर्म की अपनी ज्ञान कहलाता है यहां पर भगवान बुद्ध की बहुत सारी बुद्ध मूर्तियां है यहां पर 13 मठ है मठ एक से अधिक मंजिल के होठों के सामने आने का भव्य स्तूप है वहां पर 7 बड़े कक्ष है 300 कमरे यहां पर विद्यार्थियों के लिए सोने के लिए पत्थर के कमरे होते थे दीपक पुस्तक रखने के लिए एक आलमारी जैसा बना हुआ रहता था उस कमरे के बाहर एक कुआं रहता था इसमें बहुत सारे बगीचे और तालाब भी थे नालंदा के पुस्तकालय में तीन लाख से ज्यादा पुस्तके थी ऐसा कहते हैं कि जब वह पुस्तके जलाई गई थी तो ना जाने कितने वर्षों तक वह जलती रही थी इसी से ही हमें नालंदा के भव्यता का पता चलता है इनमें से कई पुस्तकें चीनी बौद्ध भिक्षु अपने साथ ले गए थे और वहां पर उन्होंने बौद्ध धर्म को बढ़ाया इस इस विश्वविद्यालय पर पहला आघात  बख्तियार खिलजी ने किया यहां पर तुर्क आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी ने इसे जला दिया नालंदा दुनिया की दूसरी सबसे प्राचीन यूनिवर्सिटी है यह 800 साल तक अस्तित्व में रही यहां पर पूर्ण शिक्षा भिक्षु द्वारा दी जाती थी इस विश्वविद्यालय में प्रवेश लेना साधारण नहीं था यहां पर प्रवेश लेने से पहले उस विश्वविद्यालय का प्रवेश द्वार परीक्षा लेता था नालंदा पुरी पूरी दुनिया का सर्वश्रेष्ठ विद्यालय था हमारी दुनिया का सर्व श्रेष्ठ विद्यालय नालंदा तक्षशिला है और आज भी हं शिक्षण मे आगे बडते जा राहे है

Author

Amol Kambale is founder "India-mirror" he has an interested in job news blog and entertainment topics and whatsoever his passion dedication

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