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योग भारत कि देण और सुंदर मन


योग भारत कि देण
भारत सदियों से ही विश्व के लिए अपनी देन देता रहा है भारत में बहुत से जैसे कि गणित में शून्य वैद्यकीय मे सृशुत और ना जाने कितने सारे अविष्कार किए लेकिन भारत आज प्रचलित हुआ हुआ सबसे ज्यादा लोग जिस से सर्च करते हैं उसका नाम है योग योग एक भारत की पहचान है योग हजारों सालों से चला आ रहा है योग का जन्म भारत में हुआ था भारत में ही योग शास्त्र द्वारा अभ्यास किया जाता था हजारों वर्षों से हमारा शरीर सुदृढ़ रखने के लिए मन को एकाग्र करने के लिए मन शरीर और आत्मा को मिलने के लिए योग द्वारा अभ्यास किया जाता था और तब के ऋषि मुनि बौद्ध धर्म गुरु इन्होंने अभ्यास पूर्ण योग का परमार्थ लिया योग द्वारा हम अपने अंतर भाई है मन को एकाग्र कर सकते हैं इसी योग के कारण हमारे भीतर बुरी चीजों खत्म हो जाती है और वैसे ही हमारा शरीर एक सक्षम और पवित्र बन जाता है योग द्वारा ही हम अपने शरीर को मजबूत बना सकते हैं

योग से हमारे पूर्वज अधिक आयुर्मान तक जी रहे थे योग के कुछ संदर्भ है कुछ खाने पीने की नियम है_योग का उद्गम भारत में हुआ है भारत के प्राचीन ग्रंथों में  योग का  संबंध देखा गया है  योग प्राचीन काल से  बुद्ध धर्म  जैन धर्म हिंदू धर्म  आदि धर्म ने  योग को बढ़ावा दिया है  योग से मन शांत होता है योग भारत द्वारा दी गई एक प्राचीन उपलब्धि है योग का जन्म भारत में हुआ था योग करने से आदमी स्वस्थ रहता है और इससे बीमारियां नहीं होती उसका शरीर मजबूत होता है साइंस से पता चला है कि योग करने से बहुत सारी बीमारियां दूर हो जाती है और शरीर फिट रहता है योगाभ्यास करने का सही समय सूर्योदय से पहले का है योग का नियमित अभ्यास करने से रक्तदाब अस्थमा गाठिया मधुमेह पाचन अन्य विकार खत्म हो जाते हैं

हर व्यक्ति को योग हर सुबह करना चाहिए वह किसी गुरु के निर्देश में करना चाहिए सूर्योदय से पहले योग करना चाहिए योग खाली पेट करना चाहिए और उसके 1 घंटे तक कुछ ना खाएं योग करने के लिए आराम भाई सूती कपड़ा इस्तेमाल करना चाहिए योग करने के लिए शांत वातावरण चाहिए जहां प्रयोग कर सके योग करते वक्त धीरज रखें योग के कुछ प्रकार सूर्य नमस्कार दंडासन पश्चिमोत्तानासन उत्कटासन उचित हस्त पादांगुष्ठासन अर्ध बद्ध पद्मासन पादहस्तासन पादहस्तासन पश्चिमोत्तनासन प्रसारित पादासन परिवृत्त पार्श्व कोणासन उत्थित त्रिकोणासन उत्थित पार्श्व कोणासन उर्दू पद्मासन उत्तानासन वीरभद्रासन उत्तानपादासन पिंड आसन मत्स्यासन उर्ध्वपातन सर्वांगासन हलासन शीर्षासन नाव आसन पद्मासन तुला सन उर्ध्व मुख शवासन भुजंगासन अर्ध मत्स्येंद्रासन ऐसे बहुत सारे प्रकार योगा में आते हैं हर व्यक्ति रोज अगर योगा करें तो उसे बुढ़ापा जल्दी नहीं आता और वह शारीरिक दृष्टा सक्षम रहता है   तो आइए हम शुरुआत करते हैं कि हर रोज हम योग अभ्यास कर सकें और अपने शरीर को मजबूत और सुंदर बना सके हर दिन कम से कम 30 मिनट तक हम योगाभ्यास करें और अपने मानव शरीर को स्वच्छ और निर्मल बनाएं इसी दिन को हम पीढ़ी-दर-पीढ़ी देते रहे                                                       

Author

Amol Kambale is founder "India-mirror" he has an interested in job news blog and entertainment topics and whatsoever his passion dedication

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